
बरेली जिले के फरीदपुर इलाके में रविवार को खेतों के बीच अचानक हलचल बढ़ गई, जब लखनऊ से आए बड़े अधिकारी सीधे किसानों के बीच पहुंच गए। श्री विश्वेष कनौजिया ने गांव-गांव जाकर न सिर्फ गन्ना बुवाई की हकीकत देखी, बल्कि किसानों से आमने-सामने बात कर उनकी समस्याएं भी सुनीं।
अपर गन्ना आयुक्त ने द्वारिकेश फरीदपुर क्षेत्र के जादौपुर गुलनगला, टिसुआ, कुंईया, सहपुरा, भगवानपुर फुलवा, ढकनी रजपुरी और पउनगला जैसे गांवों का दौरा किया। यहां उन्होंने बसंत कालीन गन्ना बुवाई को लेकर चीनी मिल की चल रही योजनाओं का जायजा लिया। खेतों में खड़े किसानों के साथ बातचीत के दौरान माहौल बिल्कुल अलग दिखा—कहीं उम्मीद थी, तो कहीं लागत बढ़ने की चिंता भी साफ झलक रही थी।
ग्राम जादौपुर गुलनगला के किसान सतनाम सिंह अपने खेत में तैयार सुरक्षित गन्ना बीज दिखाते हुए बोले, “सर, नई किस्मों से पैदावार बढ़ी है, लेकिन खर्च भी बढ़ रहा है।” वहीं फुलवा के विजय पाल सिंह ने बताया कि वे नई प्रजातियों को लेकर प्रयोग कर रहे हैं और बेहतर नतीजों की उम्मीद है।
अधिकारियों ने खेतों में जाकर को.शा. 13235, को.लख. 16202 और को.शा. 18231 जैसी उन्नत प्रजातियों की स्थिति देखी। पउनगला में आरएमडी तकनीक से हो रहे पेड़ी प्रबंधन का भी निरीक्षण किया गया। वहीं सहपुरा में एक किसान के खेत में पुरानी और अनुपयुक्त प्रजाति को.शा. 91269 देखकर अधिकारियों ने उसे बदलने की सलाह दी।
निरीक्षण के दौरान श्री कनौजिया ने किसानों को समझाया कि अगर सही तरीके अपनाए जाएं तो लागत घटाकर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “खेत की सही तैयारी, ट्रेंच विधि से समय पर बुवाई, अच्छे बीज का चयन और संतुलित खाद का इस्तेमाल—ये चार चीजें किसान की आमदनी बढ़ा सकती हैं।” उन्होंने रोग और कीट नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही।
गांवों में पहुंचे इस दौरे से किसानों में एक तरह की उम्मीद जगी। कई किसानों ने कहा कि पहली बार कोई बड़ा अधिकारी सीधे खेत में आकर उनकी बात सुन रहा है। हालांकि कुछ किसानों ने यह भी कहा कि योजनाओं का असली फायदा तभी मिलेगा जब उन्हें समय पर बीज और संसाधन मिलें।
इस पूरे भ्रमण के दौरान बरेली और शाहजहांपुर के गन्ना विभाग के अधिकारी, फरीदपुर और रोजा के निरीक्षक, गन्ना समिति के पदाधिकारी और चीनी मिल के कर्मचारी भी मौजूद रहे।



