
तो, फरीदपुर में मंगलवार को द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के मीटिंग हॉल में गन्ना सर्वे को लेकर एक ट्रेनिंग हुई। थोड़ा अलग था माहौल। मतलब, अब सिर्फ कागज-कलम वाली बात नहीं रही—सीधे टेक्नोलॉजी पर फोकस। और साफ कह दिया गया, इस बार ढिलाई नहीं चलेगी।
कार्यक्रम में उप गन्ना आयुक्त बरेली परिक्षेत्र राजेश मिश्रा भी थे, साथ में और भी अधिकारी। मुख्य प्रबंधक (आईटी) सुनील पूनिया ने जीपीएस मशीन से सर्वे कैसे करना है, ये समझाया। अधिकारियों ने साफ कहा—“जो प्रजाति बोई है, वही लिखी जाएगी।”

मुख्य महाप्रबंधक पवन कुमार चतुर्वेदी ने नीति पढ़ी और कहा कि इसे जैसे का तैसा लागू किया जाए। इकाई प्रमुख अनिल कुमार त्यागी ने भी ईमानदारी पर जोर दिया। सीधी बात।
अबकी बार सप्लाई टिकट भी उसी प्रजाति के हिसाब से मिलेगा, और तौल भी उसी की होगी। बदलने का ऑप्शन नहीं रहेगा। खेत का सर्वे उसी किसान के नाम पर होगा, जिसके नाम जमीन है।
सर्वे 1 मई से शुरू होगा और 30 जून तक चलेगा। कहा गया है कि इस बार पारदर्शिता पर खास ध्यान रहेगा। ठीक है।



